हो जाएं सतर्क ,भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल का भी रखना होगा ख्याल
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हो जाएं सतर्क ,भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल का भी रखना होगा ख्याल

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हृदय संबंधित रोगों की वजह से विश्व में होने वाली मौतों के तीन चौथाई मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों से सामने आते हैं।
भारत भी ऐसे ही देशों में आता है। पिछले 25 वर्षों के दौरान भारत के हर राज्य में हृदय संबंधी बीमारियों के मामले 50 फीसद से ज्यादा बढ़े हैं।
पिछले माह प्रतिष्ठित जर्नल द लैंसेट ने हृदय रोग (सीवीडी) से ग्रसित ईरानी वयस्कों पर पॉलीपिल टेबलेट (एस्पिरिन और एटोरवास्टेनिट का कांबिनेशन) के चिकित्सकीय परीक्षणों का परिणाम प्रकाशित किया था।
इससे निष्कर्ष यह निकला था कि थेरेपी के साथ-साथ दवाओं की एक निश्चित खुराक हृदय रोग से निपटने में कारगर हो सकती है।
इस आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में सेहत कहीं पीछे छूटा मुद्दा हो गया है और यह लापरवाही कहीं न कहीं जानलेवा साबित हो रही है।
फास्ट फूड और जंक फूड खाने से दिल बेहद कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि बाल और युवावस्था में भी अब दिल के दौरे पड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रदूषण भी दिल को कमजोर बना रहा है। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इस तरकीब से काफी सुधार लाया जा
हार्ट अटैक और स्ट्रोक भारत में मृत्यु के सबसे आम कारण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय रोग के कारण विश्व में होने वाली मौतों में तीन चौथाई निम्न व मध्यम आय वाले देशों में होती हैं।
इन देशों में भारत का भी स्थान आता है। हार्ट अटैक और स्ट्रोक भारत और ईरान में मृत्यु के सबसे आम कारण है।
लैंसेट की 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि हृदय से संबंधित बीमारियों में इस्केमिक डिसीज और स्ट्रोक के मामले ज्यादा होते हैं।
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